दंतेवाड़ा
गीदम निवासी सपराओ ने भीख मांगने का रास्ता छोड़ आत्मनिर्भर बनने की नई मिसाल पेश की है। समाज सेवी संतोष साहू के मार्गदर्शन ने उन्हें मजबूरी के अंधेरे से निकालकर मेहनत की राह दिखाई।
शुरूआती हिचक के बाद, सपराओ ने लगन से प्लास्टिक और रद्दी कचरा इकट्ठा करने का काम चुना। इस छोटे से बदलाव का परिणाम यह रहा कि उन्होंने एक महीने के भीतर ही तीस हजार की कमाई कर ली।
पहले जहाँ दिनभर में बमुश्किल 100 रुपए मिल पाते थे, अब उनकी आय में कई गुना वृद्धि हुई है। यह कहानी साबित करती है कि सही दिशा और इच्छाशक्ति से कोई भी अपनी तकदीर खुद बदल सकता है।
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