बीजापुर राजेश यालम का हुआ आईआईएम रायपुर में हुआ चयन हुआ है बस्तर अंचल के बीजापुर जिले के अंदरूनी इलाके से निकलकर आदिवासी युवा राजेश यालम ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIM रायपुर में ट्रेनिंग लेकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। राजेश यालम “आमचो बस्तर ढाबा एवं रेस्टोरेंट व कैटरिंग” के फाउंडर हैं, साथ ही वे हनी बी फार्मिंग (शहद उत्पादन) का भी सफल व्यवसाय कर रहे हैं।राजेश यालम आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने बताया कि बीजापुर जैसे दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र से निकलकर IIM जैसे बड़े संस्थान में चयन होना उनके लिए गर्व का विषय है।
IIM रायपुर में देश-विदेश के बिजनेस मॉडल और नई टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग दी जाती है। IIM रायपुर में आयोजित इस ट्रेनिंग में बिजनेस मैनेजमेंट, मार्केटिंग, एडवरटाइजमेंट, मार्केट वैल्यू, रिसर्च, नेक्स्ट जेनरेशन टेक्नोलॉजी, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जैसे विषयों पर अध्ययन कराया जा रहा है। इस तरह की ट्रेनिंग में आमतौर पर अंबानी, अदानी, जिंदल जैसे बड़े कॉरपोरेट समूहों से जुड़े लोग लाखों रुपये खर्च कर हिस्सा लेते हैं।
राजेश यालम ने बताया कि देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी ऐसे प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रशिक्षण ले चुके हैं। ऐसे संस्थान में भाग लेने का अवसर मिलना उनके लिए ऐतिहासिक पल है।
राजेश यालम ने इस उपलब्धि के लिए MSME ST-SC HUB और DICCI (Dalit Indian Chamber of Commerce & Industry) का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से वे इस ट्रेनिंग तक पहुँच पाए।इस ट्रेनिंग में IT सेक्टर, रियल एस्टेट, टेक्सटाइल, AI जैसे क्षेत्रों से जुड़े बड़े-बड़े CEO देश के विभिन्न राज्यों दिल्ली, बेंगलुरु, महाराष्ट्र, गुजरात, भोपाल सहित छत्तीसगढ़ और बस्तर से भी प्रतिभागी शामिल हैं।
बस्तर के युवाओं के लिए संदेश
राजेश यालम का कहना है कि बस्तर में अनेक आदिवासी युवा-युवतियाँ व्यापार तो शुरू करते हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी और सही बिजनेस नॉलेज के अभाव में उनका व्यवसाय आगे नहीं बढ़ पाता और कुछ समय बाद बंद हो जाता है। यदि ऐसे युवाओं को IIM जैसे संस्थानों में ट्रेनिंग मिले, तो वे अपने व्यापार को जिला स्तर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचा सकते हैं।
सब्सिडी में मिल रही महंगी ट्रेनिंग
राजेश यालम की यह ट्रेनिंग 6 दिवसीय है, जिसकी वास्तविक फीस 1 से 2 लाख रुपये तक होती है।लेकिन केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से यह ट्रेनिंग न्यूनतम सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार का धन्यवाद ज्ञापित किया।
उन्होंने इच्छा जताई कि इस प्रकार के कार्यक्रम और ट्रेनिंग हर आदिवासी व्यापारी, युवा-युवती और समाज के लोगों को मिलनी चाहिए, ताकि बस्तर के व्यवसाय के बने प्रोडक्ट या व्यापार देश-दुनिया तक पहुँच सकें।
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