खबरबाज न्यूज़
रिपोर्टर - धर्मेन्द्र यादव
पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक वनों के संवर्धन और जैव विविधता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंगलवार, 30 जून 2026 को सांकरा एवं नगरी वन परिक्षेत्र में बड़े स्तर पर सीड बॉल (Seed Ball) एवं विभिन्न स्थानीय प्रजातियों के बीजों का रोपण किया गया। वर्षा ऋतु की शुरुआत के साथ चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत वन विभाग ने हजारों की संख्या में बीजों और सीड बॉल का रोपण कर हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार सांकरा वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक आर.एफ. 382 में लगभग 0.500 हेक्टेयर क्षेत्र में महुआ, बेर, करंज, इमली, कुसुम, आम, हर्रा एवं बेहड़ा जैसी स्थानीय और उपयोगी प्रजातियों के 1,000 सीड बॉल तथा 2,000 बीजों का रोपण किया गया।
इसके अलावा सांकरा एवं नगरी वन परिक्षेत्र के विभिन्न वन क्षेत्रों में निर्मित एससीटी (SCT), सीसीटी (CCT), अर्दन डेम, परकोलेशन टैंक तथा सीपीटी (CPT) की मेड़ों पर भी बड़े पैमाने पर 20,000 सीड बॉल एवं विभिन्न जंगली प्रजातियों के बीजों का रोपण किया गया। इस प्रकार पूरे अभियान में कुल 22 हजार से अधिक सीड बॉल एवं बीज वन क्षेत्रों में रोपे गए।
वन विभाग का मानना है कि मानसून के दौरान किए गए इस प्रकार के रोपण से प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा मिलेगा, वनों का विस्तार होगा तथा आने वाले वर्षों में क्षेत्र का हरित आवरण और अधिक सुदृढ़ होगा। स्थानीय प्रजातियों के वृक्ष विकसित होने से वन्य जीवों को प्राकृतिक आवास एवं भोजन भी उपलब्ध होगा, जिससे जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।
वन अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि सामुदायिक सहयोग से ही वन संरक्षण के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
एस. रौतिया – एसडीओ (अनुविभागीय वन अधिकारी), नगरी
संदीप सोम – परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर)
उमेश सोरी – परिक्षेत्र अधिकारी
ओमप्रकाश चन्दनिया – सहायक परियोजना अधिकारी (एस.पी.ए.)
पन्ना सोनी – सहायक परियोजना अधिकारी (एस.पी.ए.)
रवि कुमार यादव – सहायक परियोजना अधिकारी (एस.पी.ए.)
नन्द यादव – वनपाल
खबरबाज न्यूज़ के अनुसार यह अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, समृद्ध और हरित वन क्षेत्र तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मानसून के दौरान इस तरह के प्रयासों से वनों के संरक्षण, जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने में उल्लेखनीय सफलता मिलने की उम्मीद है।
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