कोण्डागांव। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज जिला कोण्डागांव पं.क्र. 4230 /8/4/2013 के जिला अध्यक्ष पनकूराम नेताम, उपाध्यक्ष विजय कुमार सोरी,करुणा कोर्राम, जिला अध्यक्ष महिला प्रभाग कमला नेताम, सुमित्रा नेताम ब्लॉक अध्यक्ष माकड़ी, रुकमणी नेताम, सामनाथ सोरी, सुंदर नेताम, लक्ष्मण कष्यप आदि सहित अन्य सामाजिक जनों के द्वारा 25 मई को पुर्वजों के सार्वजनिक शमसान घाट (मरघट) को कब्जा मुक्त करवाने सम्बन्धी एस.ड़ी.एम. कोण्डागांव को सौंपे गए आवेदन/ज्ञापन को जिला प्रषासन द्वारा संज्ञान में लिया जाकर जांच के निर्देष जारी करने पर तहसीलदार माकड़ी द्वारा विधिवत नोटिस जारी कर षिकायतकर्ताओं और अनावेदक की उपस्थिति में 30 मई को स्वयं की उपस्थिति में आर.आई., हल्का पटवारी अन्य राजस्व कर्मचारियों सहित पुलिस बल की उपस्थिति में विधिवत सीमांकन करवाया गया।
सीमांकन करने पर ज्ञात हुआ कि छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज जिला कोण्डागांव के बेनर तले षिकायतकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत षिकायत सही पाया गया और अनावेदक का पुर्वजों के सार्वजनिक शमसान घाट (मरघट) पर कब्जा पाया गया।
छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज जिला कोण्डागांव के जिला अध्यक्ष पनकूराम नेताम की उपस्थिति में मामले की जांच के दौरान षिकायतकर्ता सामाजिकजनों के काफी संख्या में उपस्थित रहने के बावजूद सीमांकन का कार्य षांतिपुर्ण तरीके से सम्पन्न हुआ, जिसे वे एक उपलब्धी मान रहे हैं, क्योंकि जहां अधिक भीड़ जमा हो जाता है, वहां अक्सर विवाद की स्थिति निर्मित हो जाती है।लेकिन सामाजिकजनों ने सीमांकन कार्य को षांतिपुर्वक करने दिया,सार्वजनिक शमसान घाट (मरघट) पर से कब्जा किए होने की पुश्टि होने के बाद भी षांति बनाए रखा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष के नाते मैने अपने दायित्व का निर्वहन कर दिया है, वहीं मौके पर उपस्थित तहसीलदार ने 10 दिवस के भीतर शमसान घाट (मरघट) पर किए गए कब्जा को हटाने का मौखिक निर्देष अनावेदक को दिया है। मैं उम्मीद करता हूं कि तहसीलदार माकड़ी भी अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए 10 दिन में अनावेदक द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटवा देंगे। अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर समाज पुनः वैधानिक कार्यवाही करने की मांग करेगा, तब भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो सामाजिक प्रक्रिया के तहत समाज स्वयं अतिक्रमण को हटाएगा। जिसकी सम्पूर्ण जिम्मदारी राजस्व प्रषासन की होगी।
ज्ञात हो कि जिला कलेक्टर कोण्डागांव एवं तहसीलदार माकड़ी को सम्बोधित ’’हमारे पुर्वजों के सार्वजनिक शमसान घाट (मरघट) को कब्जा मुक्त करवाने’’ सम्बन्धी ज्ञापन 25 मई को दिया गया था। जिसमें लेख किया गया था कि मां संतोषी फयूल्स एच.पी.पेट्रोल पंप के पीछे स्थित हमारे आदिवासी पूर्वजों का सार्वजनिक शमसान घाट (मरघट) है, जिसमें हमारे पुर्वज विगत 80, 90 वर्षों से शव दफनाते आ रहे हैं। उक्त मरघट एवं हमारे पुर्वजों के मठों को बिरस प्रसाद साहू माकडी के द्वारा मिटटी पटवाकर एवं घेराव करके ईंट बनाने वाला मशीन लगाया गया है। जिससे हमें शव दफनाने में दिक्कत हो रही है का लेख करते हुए सार्वजनिक मरघट को अतिक्रमण/कब्जा मुक्त करवाए जाने का आग्रह किया गया था। इस ज्ञापन को ही संज्ञान में लेकर 30 मई को राजस्व विभाग द्वारा विधिवत सीमांकन कराया गया।
राजस्व विभाग द्वारा अतिक्रमण किए होने की पुश्टि हेतु सीमांकन कराए जाने के दौरान गायता संतराम पोयाम, माटी पुजारी गुड़राम पोयाम, दिपेष पोयाम, रामप्रसाद नेताम, भोवित पोयाम, मन्सु पोयाम, दषरथ नेताम, सघन बघेल, समरथ मरकाम, सरादू सोरी, नरेंद्र बघेल, मानसाय कोर्राम, काहरुराम मरकाम, धरम मरकाम, सूकलू सोरी, मोहन मरकाम, सोमलाल मरकाम, फरसू नेताम, जयप्रकाष नेताम, श्रीराम मरकाम, सोनारु मरकाम, चौधरी मरकाम, घसिया मरकाम, दूर्जन मरकाम, सिवेन्द्र पोयाम, राजेष पोयाम, दषरथ पोयाम, अर्जुन पोयाम आदि सहित सामाजिकजन काफी संख्या में उपस्थित रहे।
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