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डीएमएफ जिला होने के बावजूद दंतेवाड़ा जिला अस्पताल बदहाल

मरीजों के स्वास्थ्य अधिकारों पर कुठाराघात एवं लापरवाही बर्दाश्त नहीं -मनीष
 
अस्पताल की डायलेसिस एवं लैब यूनिट को निजि हाथों में सौंपने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण ।

आज भी जिला अस्पताल बना हुआ है रेफर सेंटर

दंतेवाड़ा - हर किसी को बेहतर स्वास्थ्य मिले ये उसका मौलिक एवं मानवीय अधिकार है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्स माना गया है। क्षेत्र के नागरिकों एवं ग्रामीण इलाकों से आने वाले आदिवासी भाई बहनों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना किसी भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या अधिकारों पर कुठाराघात बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उक्त बातें जिला कांग्रेस कमेटी दंतेवाड़ा के युवा मिडिया प्रभारी *मनीष ठाकुर* ने दंतेवाड़ा जिला अस्पताल की दिनों दिन बदहाल होती स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता जाहिर करते कहा है। 
ठाकुर ने भाजपा सरकार एवं दंतेवाड़ा जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य प्रशासन पर आरोप लगाते कहा है कि आज समय कहां से कहां पहुंच गया मगर हमारा दंतेवाड़ा जिला का सरकारी अस्पताल आज भी रेंफर सेंटर ही बना हुआ है। इस आधुनिक युग में जब हर चीज एडवांस होता चला जा रहा है वहीं दंतेवाड़ा जिले में आज भी दुरस्थ अंचलों से मरीजों को खाट पर ढोकर अस्पताल लाने का दृश्य दिखाई पड़ता है जो पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान लगाता है। स्वास्थ्य मंत्री पर कटाक्ष करते कहा कि दंतेवाड़ा से खनिज एवं न्यास निधि डीएमएफ से करोड़ों रूपए प्राप्त होने के बाद भी जिला अस्पताल बदहाल स्थिति में क्यों पड़ा हआ है? अस्पतालों की दुदर्शा को ठीक करना छोड़ उल्टा डायलेसिस, लैब यूनिट एवं रेडियोलॉजिस्ट सेवाओं को सीआईडीएमएस के माध्यम से निजि कंपनियोंं को सौंपने की तैयारी अंदरखाने चल रही है जो अत्यंत ही चिंतनीय एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे संवेदनशील विभागों का निजिकरण गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को महंगा और जटिल बना देगा। श्री ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2016-17 से डीएफएफ फंड से संचालित डायलेसिस यूनिट एवं वर्षो से संचालित जिला अस्पताल की लैब जहां विभिन्न प्रकार के जांचें नि:शुल्क की जाती है उसे भी अब बेचने की तैयारी हो रही है जिसकी जितनी भत्र्सना की जाए कम है। जिला अस्पताल में 90 परसेंट लोग ईलाज करवाने ग्रामीण इलाकों से गरीब आदिवासी तबके के लोग आते हैं। प्राईवेट अस्पतालों में महंगी इलाज वे करा नहीं सकते इसलिए सरकारी अस्पतालों में वे ईलाज के लिए आते हैं ऐसे में डायलेसिस एवं लैब यूनिट को निजि हाथों में सौंपने से संचालक मरीजों से जांच के नाम पर मनमानी रकम वसूली करेंगे। गरीब आदिवासी भाई बहन इतने रूपए कहां से दे पाएंगे। सरकार गरीब आदिवासियों की हितैषी होने का दंभ भरती है मगर असल में भाजपा की सरकार यहां के संसाधनों के साथ साथ अस्पताल की व्यवस्था को भी निजि हाथों में सौंप देना चाहती है जो बर्दाश्त के बाहर है। अगर इस प्रकार की मंशा स्वास्थ्य मंत्री ने पाल रखा है तो उसे छोड़ दे अन्यथा कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर इसका पुरजोर विरोध करेगी और भाजपा का असल चाल, चरित्र व चेहरा जनता के सामने लाकर रख देगी। मिडिया प्रभारी मनिष ठाकुर ने आगे कहा कि दंतेवाड़ा जिला डीएमएफ जिला है यहां रूपयों की कोई कमी नहीं है पहले डीएमफ के राशि से अस्पताल की व्यवस्था संचालित होती थी मगर किंतु पिछले करीब 6 माह से जिला अस्पताल में डीएमएफ की राशि को रोक दिया गया है। राशि के अभाव में अस्पताल की व्यवस्था बुरी तरीके से चरमरा गई है। फंड नहीं दिए जाने से कई आवश्यक दवाएं एवं मेडिकल सामाग्रियों की भारी कमी हो गई है जिसका सीधा असर गरीब आदिवासी मरीजों पर पड़ रहा है। मरीजों को बाहर से महंगी दवाईयां खरीदनी पड़ रही है। अस्पताल में जांच के नाम पर भी खानापूर्ति ही की जाती है ज्यादातर जांचें लोग मजबूरी में बाहर प्राईवेट लैबों में जाकर करवाने को मजबूर होते हैं। महंगी महंगी मशीनें तो अस्पताल में लगी पड़ी है मगर मेंटनेंस एवं टेक्रिशियनों के अभाव में जाचें नहीं हो रही इसका कोई लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा। थायराइड समेत कई प्रकार की जाचें आज भी लोग प्राईवेट लैब में ही जाकर करवाते हैं। डॉक्टर जो पर्ची मरीजों की लिखता है उसमें से आधी दवाईयां तो अस्पताल में मिलती ही नहीं मेडिकल से ही खरीदना पड़ता है। अब मरता क्या न करता की तर्ज पर मरीज मजबूर होकर बाहर मेडिकल से दवाईयां लेने को मजबूर होता है। यह स्थिति सरकार की संवेदनशीनता को दर्शाती है। सरकारं अगर डीएमएफ की राशि बंद नहीं करती तो अस्पताल की स्थिति इतनी ज्यादा खराब नहीं होती। अंत में मिडिया प्रभारी मनीष ठाकुर ने कहा कि जिला कांग्रेस कमेटी दंतेवाड़ा गरीब, आदिवासी एवं आम नागरिकों के स्वास्थ्य अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो पार्टी जनहित में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन के लिए बाध्य होगी जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।

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