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कल तक हथियार, आज शिक्षा का अधिकार-सुकमा जिले में बदलाव की कहानी,जहाँ गूँजती थी गोलियों की आवाज, अब कलम लिख रही है नई उम्मीद

सुकमा - छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बदलाव की एक प्रेरक तस्वीर सामने आई है, जहाँ कभी हिंसा के साये में जीने वाले युवा अब शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन की नई दिशा तय कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित “उल्लास नवभारत साक्षरता महापरीक्षा” कार्यक्रम ने जिले में जन जन को साक्षर बनाने के उद्देश्य से सामाजिक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी है।

रविवार को आयोजित राज्यव्यापी बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान मूल्यांकन परीक्षा में सुकमा जिले के नक्सल पुनर्वास केंद्र में 140 से अधिक पुनर्वासित युवाओं ने भाग लिया। ये वही युवा हैं जिनके हाथों में कभी बंदूक हुआ करती थी, लेकिन आज वही हाथ कलम थामकर अपने भविष्य को संवारने में जुटे हैं।
यह पहल केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि विश्वास, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प सुकमा और बस्तर में हो रहे इस सकारात्मक परिवर्तन के रूप में साकार होता दिख रहा है।

नक्सल पुनर्वास केंद्र एक विशेष और प्रतीकात्मक केंद्र के रूप में उभरा, जहाँ आत्मसमर्पित नक्सली अब मुख्यधारा से जुड़कर एक नई शुरुआत कर रहे हैं। सुकमा जिले की यह बदलती तस्वीर स्पष्ट संदेश दे रही है कि अब क्षेत्र में हिंसा नहीं, बल्कि शिक्षा और विकास की रोशनी फैल रही है। सच में, अब बंदूक नहीं, कलम से भविष्य लिखा जा रहा है।

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