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नक्सल साये से निकलता मेड़वाही, लेकिन सुविधाओं का अंधेरा बरकरार, दीपिका ने ग्रामीणों संग लगाई चौपाल

सुकमा –कभी नक्सल प्रभाव के लिए बदनाम रहा मेड़वाही गांव अब बदलाव की ओर कदम बढ़ा रहा है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी आज भी ग्रामीणों के जीवन को कठिन बनाए हुए है। करीब 1200 आबादी वाले इस दोरला एवं गोंड़ जनजाति बाहुल्य गांव में योजनाएं कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत अब भी संघर्ष भरी है।
इसी हकीकत को समझने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी गांव पहुंचीं। उन्होंने चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना। इस दौरान उन्होंने पूर्व नक्सली मड़कम भीमा से भी मुलाकात कर उसकी परेशानियों को जाना।

“भवन बना, सुविधा नहीं – 15 किमी दूर से लाना पड़ता राशन”
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पीडीएस भवन तो मौजूद है, लेकिन राशन लेने के लिए 15 किलोमीटर दूर पोलमपल्ली जाना पड़ता है। बारिश के मौसम में नदी पार करना जोखिम भरा हो जाता है, जिससे उन्हें लंबा और कठिन रास्ता तय करना पड़ता है।
“अधूरी सड़क और पुल की कमी, हर बारिश बनती है संकट”
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत स्वीकृत सड़क अधूरी पड़ी है। ठेकेदार द्वारा केवल मिट्टी डालकर काम छोड़ दिया गया है। बारिश के दिनों में गांव का संपर्क टूट जाता है, जिससे एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच पाती और मरीजों को खाट पर ले जाना पड़ता है।
“सलवा जुडूम की त्रासदी आज भी जिंदा”
कोया समाज के अध्यक्ष सोढ़ी हांदा ने बताया कि सलवा जुडूम के दौरान अरलमपल्ली में 150 से अधिक घर जला दिए गए थे। आज भी प्रभावित परिवार झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घरों की मांग कर रहे हैं।
“झोपड़ी में शिक्षा, अधूरा पड़ा स्कूल भवन”
अरलमपल्ली में स्कूल आज भी झोपड़ी में संचालित हो रहा है। शाला भवन का निर्माण अधूरा पड़ा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
“पानी के लिए संघर्ष,दो साल से बंद सोलर पंप”
गांव में पेयजल की समस्या गंभीर बनी हुई है। सोलर पंप दो साल से खराब पड़ा है और मरम्मत के लिए ले जाने के बाद अब तक वापस नहीं लगाया गया।
“नल-जल और शौचालय योजना सिर्फ कागजों में”
ग्रामीणों ने बताया कि शौचालय अनुपयोगी हैं और नल-जल योजना के तहत लगे नलों में पानी नहीं आता। योजनाएं धरातल पर पूरी तरह विफल नजर आ रही हैं।
“मुख्यधारा में लौटे, लेकिन पहचान से वंचित”
पूर्व नक्सली मड़कम भीमा ने बताया कि मुख्यधारा में लौटने के बावजूद उसे आधार कार्ड और वोटर आईडी नहीं मिला है, जिससे वह सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहा।
“चौपाल से जगी उम्मीद”
दीपिका शोरी ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों तक पहुंचाने और जल्द समाधान का आश्वासन दिया। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि वर्षों से चली आ रही समस्याओं का समाधान होगा और मेड़वाही में विकास की रोशनी पहुंचेगी।

दीपिका शोरी(सदस्य छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग)---
मुझे लगातार मेड़वाही के ग्रामीणों के द्वारा मोबाइल के माध्यम से अपने गाँव की समस्याओं से अवगत कराया जा रहा था इसलिए मैंने स्वयं यहाँ आकर इनके बीच बैठकर इनका दर्द बांटने का प्रयास किया है हमारे जिले के कलेक्टर अमित कुमार एवं छत्तीसगढ़ के मुखिया विष्णुदेव साय दोनो ही बहुत संवेदनशील हैं मैंने इस गाँव के लोगों को भरोसा दिलाया है कि जल्द ही इनकी समस्याओं को दूर करने हेतु जो भी उत्तम से उत्तम कदम होंगे वो किया जाएगा।
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