खबर बाज न्यूज़

वन्यप्राणी कोटरी एवं उड़न गिलहरी का शिकार करने वालेफरार 05 आरोपियों को किया गया जेल दाखिला

गरियाबंद - उदंती-सीतानदी टाईगर रिजर्व गरियाबंद के परिक्षेत्र इंदागांव (धुरवागुड़ी) बफर के अन्तर्गत पीपलखूंटा 'ब' बीट आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 1204 में वन्यप्राणी कोटरी एवं उड़न गिलहरी का शिकार करने वाले 05 आरोपियों को जेल दाखिला किया गया। 

आरोपियों में से 01 व्यक्ति हिरासिंग पिता कान्दरु कमार ग्राम-अछला, थाना-रायघर, जिला-नवरंगपुर (उड़ीसा) को पुछताछ के लिए परिक्षेत्र कार्यालय इंदागांव (धुरवागुड़ी) बफर लाया गया था पुछताछ के दौरान उनके चाचा के घर 01 नग भरमार बन्दुक को सर्च वारंट जारी कर जप्त किया जा चुका है।प्रकरण में सम्मिलित 10 आरोपियों के विरुद्ध परिसररक्षी रामकृष्ण साहू गेमगार्ड के द्वारा पी.ओ.आर.प्रकरण क्रमांक 16/392 दिनांक 13 मार्च 2026 को दर्ज कर वन्यप्राणी (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 9,27,29,31,39 (1) द,50,50 (स), 51 एवं 52 के तहत कार्यवाही किया गया।
 सारे प्रकरण में 05 अन्य संदेही फरार थे उन आरोपियों को दिनांक 17.मार्च.2026 को गरियाबंद से एंटी पोचिंग टीम के द्वारा हिरासत में लिया गया। परिक्षेत्र कार्यालय इंदागांव (धुरवागुड़ी) बफर लाकर पुछताछ करने पर सभी आरोपियों ने दिनांक 10.मार्च.2026 की मध्य रात्रि छ.ग. के गोड़ेना कछार जंगल आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 1204 में अवैध प्रवेश कर वन्यप्राणी कोटरी एवं उड़न गिलहरी का तीर धनुष एवं गुलेल द्वारा शिकार करना स्वीकार किया।आरोपी प्रभुलाल के घर से कोटरी का लगभग 100 ग्राम मांस बरामद किया गया सभी आरोपियों को दिनांक 18.मार्च.2026 को माननीय न्यायालय प्रथम श्रेणी देवभोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया एवं जहां से माननीय न्यायालय के आदेश पर 10 दिनों के न्यायिक अभिरक्षा पर जिला जेल गरियाबंद दाखिला किया गया।

उक्त कार्यवाही में सहायक संचालक (उदंती) मैनपुर, गोपाल सिंह कश्यप, सुशील कुमार सागर परिक्षेत्र अधिकारी इंदागांव,चंद्रबली ध्रुव वन परिक्षेत्र अधिकारी दक्षिण उदंती, भूपेन्द्र कुमार सोनी वनपाल, विरेन्द्र कुमार ध्रुव, टकेश्वर देवागन व.र., रुस्तम यादव व.र., रामकृष्ण साहू व.र., जय ललीता ध्रुव व.र., पामेश्वरी व.र., देवीसिंग यादव पेट्रोलिंग श्रमिक, गिरधारी बिसी, पुनीत राम ध्रुव, जानकी बाई ठाकुर व सुरक्षा श्रमिक इंदागांव (धुरवागुड़ी) बफर एवं दक्षिण उदंती परिक्षेत्र एवं उड़ीसा प्रांत के वन कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा।

Post a Comment

Previous Post Next Post