सुकमा -कोंटा के तहसील के सामने स्थित माता रानी मंदिर में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी देवी नवरात्रि का पर्व बड़े ही धूमधाम, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। यह मंदिर आज श्रद्धालुओं के लिए एक अद्भुत, दर्शनीय और गहरी आस्था का केंद्र बन चुका है, जहां दूर-दूर से लोग माता रानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
इस मंदिर की सबसे विशेष और चमत्कारी बात यह है कि लगभग 22 वर्ष पहले माता रानी की यह पवित्र मूर्ति स्वयं भूमि से प्रकट हुई थी। भूमि से निकली हुई इस अलौकिक और अनोखी प्रतिमा को देखकर लोगों की आस्था और भी दृढ़ हो गई और तभी से यहां लगातार पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ, जो आज तक जारी है।
एक और अनोखी बात जो इस मंदिर को सबसे अलग बनाती है, वह यह है कि यहां कोई पंडित नहीं होता। सभी श्रद्धालु अपनी सच्ची भक्ति और श्रद्धा से स्वयं ही माता रानी की पूजा-अर्चना करते हैं। बिना किसी पंडित के भी यहां नवरात्रि का आयोजन पूरे उत्साह, अनुशासन और भव्यता के साथ संपन्न होता है, जो सच्ची आस्था और सामूहिक विश्वास का जीवंत उदाहरण है।
यहां नव दुर्गा माता रानी की स्थापना की गई है। शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि, दोनों ही अवसरों पर पूरे नगरवासियों के नाम से ज्योत जलाई जाती है और कलश स्थापना भी सभी नगरवासियों के नाम से की जाती है, जिससे पूरे नगर की सामूहिक आस्था और एकता का सुंदर स्वरूप देखने को मिलता है।
आज यह मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि विश्वास, चमत्कार और समाज की एकजुटता का प्रतीक बन गया है। यहां आने वाला हर भक्त माता रानी की दिव्य शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा को महसूस करता है।
संदेश साफ है — जब भक्ति सच्ची हो, तो माता रानी स्वयं मार्ग दिखाती हैं। कोंटा का यह माता रानी मंदिर उसी जीवंत आस्था और चमत्कार की पहचान है।
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