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मीनपा मुठभेड़: 5 साल बाद भी नम हो जाती हैं आंखें,वीर जवानों की शहादत को बस्तर का सलाम

सुकमा - सुकमा जिले के इतिहास में आज से ठीक 5 साल पहले, 21 मार्च 2020 का वह दिन था जो एक दर्दनाक लेकिन साहस से भरा अध्याय बनकर दर्ज हो गया। मीनपा के घने जंगलों में नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में देश ने अपने 17 वीर जवानों को खो दिया था। उस दिन गोलियों की गड़गड़ाहट और बारूदी सुरंगों के धमाकों के बीच जवानों ने अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

यह घटना सिर्फ सुकमा ही नहीं, पूरे देश को झकझोर देने वाली थी। बस्तर के कई परिवारों ने अपने वीर पुत्रों को खोया और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उस समय के सुकमा पुलिस अधीक्षक सलभ सिंह भी इस घटना से इतने भावुक हो गए थे कि उनकी आंखें नम हो गईं। जवानों की शहादत ने हर किसी के दिल को छू लिया था।

मीनपा के वे जंगल, जहां कभी गोलियों की आवाजें गूंजती थीं और सड़कें खून के छींटों से भीग जाती थीं, आज धीरे-धीरे बदलाव की कहानी कह रहे हैं। नक्सलवाद के अंधकार से बाहर निकलकर बस्तर अब शांति, विकास और समृद्धि की राह पर आगे बढ़ रहा है। आदिवासी अंचलों में भरोसा लौट रहा है और नई उम्मीदें जन्म ले रही हैं।

इस सकारात्मक बदलाव के पीछे उन वीर जवानों की कुर्बानी है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर बस्तर को सुरक्षित भविष्य की दिशा दी। आज जब हालात बेहतर हो रहे हैं, तो यह दिन हमें याद दिलाता है कि शांति की यह राह कितनी बड़ी कीमत चुकाकर हासिल हुई है।

बस्तर की मिट्टी में रचे-बसे उन सभी शहीद जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि। उनका साहस और बलिदान हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

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