सुकमा - जिले में ग्रामीण विकास और जनजागरूकता को नई दिशा देने हेतु जिला प्रशासन द्वारा एक सराहनीय पहल करते हुए जिला मुख्यालय सुकमा में सार्थक दूतों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला कलेक्टर श्री अमित कुमार एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत मुकुन्द ठाकुर के नेतृत्व में आयोजित हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 25 सार्थक दूतों ने भाग लेकर साक्षरता और सामुदायिक सशक्तिकरण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। कार्यक्रम का संचालन जिला शिक्षा विभाग एवं पीपीआईए फेलो अर्कजा कुठियाला द्वारा किया गया। उल्लेखनीय है कि यह परियोजना नीति आयोग द्वारा वित्तपोषित है।
टीसीएस विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण, सुकमा पहुंचे देश के अनुभवी प्रशिक्षक
प्रशिक्षण को प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के लिए TCS के सहयोगी श्री किशन (अहमदाबाद) एवं तरुण (उज्जैन) विशेष रूप से सुकमा पहुंचे। उन्होंने दो दिनों तक प्रतिभागियों को गहन प्रशिक्षण देते हुए साक्षरता कार्यक्रम की रणनीतियों, क्रियान्वयन और मूल्यांकन की तकनीकी जानकारी प्रदान की।
साक्षरता से आगे, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता सुकमा
दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों के साथ विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा एवं अभ्यास किया गया। इसमें साक्षरता के महत्व, टीसीएस साक्षरता कार्यक्रम का परिचय, कार्यक्रम सामग्री का उन्मुखीकरण, क्रियान्वयन की रणनीति, सुकमा बेसलाइन सर्वे के निष्कर्ष, तथा मॉनिटरिंग, मूल्यांकन एवं प्रभाव जैसे बिंदुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया। यह पहल केवल पढ़ना-लिखना सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य साक्षरता से आगे बढ़कर आजीविका और आत्मनिर्भरता के लिए समुदायों को सक्षम बनाना है।
एसएचजी से जुड़कर महिलाओं को मिलेगा सशक्त मंच
कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के स्व-सहायता समूहों (एसएचजी) के साथ समन्वय स्थापित कर उन्हें अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की योजना है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय समझ, डिजिटल उपयोग और अधिकारों की जानकारी देकर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
*कार्यात्मक, वित्तीय और डिजिटल साक्षरता से बनेगा मजबूत समाज*
टीसीएस टीम द्वारा विकसित प्रशिक्षण सामग्री में कार्यात्मक साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता एवं अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण समुदायों को केवल साक्षर नहीं, बल्कि सशक्त, जागरूक और आत्मनिर्भर नागरिक बनाना है।
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