सुकमा - दंडकारण्य की पावन धरती कोंटा नगर के लिए यह एक ऐतिहासिक और सौभाग्यपूर्ण क्षण रहा, जब संत श्री शिरोमणि हिमालय गिरी महाराज जी का सर्वप्रथम आगमन यहां हुआ। महाराज जी विश्वनाथ से रामेश्वरम तक की पदयात्रा पर निकले हैं। मान्यता है कि प्रभु श्रीराम के वनवास काल में भी इसी दंडकारण्य क्षेत्र से उनका पदयात्रा मार्ग गुजरा था, ऐसे में इस तपोभूमि पर संत का आगमन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।
अखंड भारत की परंपरा में ऋषि-मुनियों और संत-महात्माओं का योगदान सदैव मार्गदर्शक रहा है। उन्होंने समाज को धर्म, ज्ञान, संयम और मानवता का संदेश दिया तथा समय-समय पर जनमानस को सत्य और सदाचार की राह दिखायी। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संत शिरोमणि महाराज का यह पदयात्रा अभियान भी आध्यात्मिक जागरण और सामाजिक एकता का संदेश दे रहा है।
महाराज जी के आगमन से कोंटा नगर में भक्ति और आनंद का वातावरण देखने को मिला। नगरवासियों ने पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ उनका भव्य स्वागत किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं श्री श्री श्री मानिकेश्वर शिव मंदिर समिति के सदस्य स्वागत में उपस्थित रहे। पुष्प वर्षा और जयघोष के बीच संत शिरोमणि महाराज को विधिवत शोभायात्रा के साथ श्री श्री श्री मानिकेश्वर शिव मंदिर तक लाया गया।
कोंटा नगर की यह परंपरा रही है कि यहां आने वाले संत-महात्माओं का पूरे सम्मान और आदर के साथ स्वागत किया जाता है। यही कारण है कि इस आध्यात्मिक आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार किया, बल्कि पूरे क्षेत्र में एकता, शांति और संस्कृति के प्रति गर्व की भावना को भी मजबूत किया।
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