पत्रकार, व्यापारी और आम लोगों पर हमलों से बिगड़े हालात, कार्रवाई को लेकर उठे सवाल
दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा जिले में कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला महामंत्री एवं प्रवक्ता विमल सलाम ने बयान जारी करते हुए कहा कि दंतेवाड़ा में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, और सत्ता के संरक्षण में गुंडागर्दी खुलेआम चरम पर है—यह बेहद चिंताजनक और निंदनीय है।उन्होंने आगे कहा कि पत्रकार, व्यापारी और आदिवासी समाज के लोगों पर लगातार हो रहे हमले यह साबित करते हैं कि पुलिस निष्क्रिय नहीं, बल्कि दबाव में काम कर रही है या जानबूझकर आंखें मूंदे हुए है।बीते कुछ समय से जिले में लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जो चिंता का विषय हैं। पत्रकारों को खबर प्रकाशित करने पर कथित तौर पर धमकियां दी जा रही हैं, वहीं गीदम में एक प्रतिष्ठित व्यापारी के साथ मारपीट की घटना ने माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
इसके अलावा गीदम थाना परिसर में ही पत्रकार और उनके परिजनों के साथ मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप भी सामने आए हैं। मामला उस समय और गंभीर हो गया जब पीड़ित पक्ष के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज किए जाने की बात सामने आई। इसके विरोध में सामाजिक एवं पत्रकार संगठनों ने नाराजगी जाहिर करते हुए पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा और पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।इसी क्रम में एक आदिवासी युवक के साथ कथित मारपीट एवं समय पर इलाज न मिलने की घटना भी सामने आई है। नकुलनार, कटेकल्याण और दंतेवाड़ा क्षेत्र में लगातार हो रही घटनाओं से आम जनता में भय का माहौल व्याप्त है।हाल ही में ग्राम बड़े कमेली के सरपंच करण तामो के साथ मारपीट एवं उनकी कार को थाने से बाहर निकालकर तोड़फोड़ किए जाने की घटना ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।विमल सलाम ने कड़े शब्दों में सवाल उठाते हुए कहा कि क्या दंतेवाड़ा में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है? क्या राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस निष्क्रिय बनी हुई है, या फिर अपने कर्तव्यों को भूलकर सत्ताधारी दल की जी-हुजूरी में लगी हुई है?उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान भाजपा सरकार के शासनकाल में कानून व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है।
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