लोकेशन - दंतेवाड़ा/छत्तीसगढ़
भांसी डिपॉज़िट-4 को लेकर चल रहा विवाद अब बस्तर में बड़े आंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। पहाड़ बचाने के लिए शुरू हुआ “पहाड़ चलो आंदोलन” अब तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में एनसीएल और जिला प्रशासन द्वारा बुलाई गई संयुक्त बैठक में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने खुलकर विरोध दर्ज कराया।
कांग्रेस जिला प्रवक्ता विमल सलाम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि एनसीएल और प्रशासन जनता को गुमराह कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि ग्रामीण लगातार खनन का विरोध कर रहे हैं, तो यह साफ संकेत है कि जमीन देने की कोई सहमति नहीं है। इसके बावजूद अगर दस्तावेज पूरे होने का दावा किया जा रहा है, तो वे दस्तावेज संदिग्ध हैं।
विमल सलाम ने आरोप लगाया कि एनसीएल के पास स्थानीय विकास को लेकर कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है। स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसे बुनियादी मुद्दों पर सवालों के जवाब देने में अधिकारी असमर्थ नजर आए। उनका कहना है कि एनसीएल की मंशा सिर्फ पहाड़ हासिल कर खनन करने की है।
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि जबरन खनन का प्रयास हुआ, तो स्थानीय युवा और ग्रामीण अपने जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेंगे। साथ ही, एनसीएल से मांग की गई है कि पुराने ग्राम सभा दस्तावेजों को सार्वजनिक कर तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।
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