धमतरी। खबरबाज न्यूज
धमतरी जिले के नगरी-सिहावा अंचल की पहचान जल्द ही आध्यात्म और प्रकृति पर्यटन के नए केंद्र के रूप में होने जा रही है। नगरी विकासखंड के मेचका गांव के पास स्थित मेखलाकार पहाड़ी पर बसी मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली मांदागिरी को संवारने की तैयारी शुरू हो गई है।
नगरी से करीब 27 किमी दूर स्थित इस पर्वत का धार्मिक और प्राकृतिक दोनों ही दृष्टि से खास महत्व है। पौराणिक कथा के अनुसार मुचुकुंद महाराज इक्ष्वाकु वंशी राजा मांधाता के पुत्र थे, जिन्होंने देवताओं की सहायता के लिए असुरों से लंबा युद्ध किया था। सिहावा-नगरी का यह पूरा क्षेत्र प्राचीन काल से ऋषि-मुनियों और सप्तऋषियों की तपोभूमि के रूप में जाना जाता है।
पहाड़ी पर स्थित आश्रम के पास प्राचीन मूर्तियां, माता सीता सहित कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और सुंदर तालाब है। हर साल बड़ी संख्या में वनवासी और दूर-दराज से श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं।
पर्यटन की अपार संभावना
मांदागिरी सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि प्रकृति और एडवेंचर के लिए भी खास है। यहां ट्रेकिंग की पूरी संभावना है। पहाड़ी की चोटी से सोंढूर जलाशय और पूरे वनांचल का विहंगम नजारा दिखता है, जो पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है।
कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने कहा कि मांदागिरी धमतरी की समृद्ध आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत का हिस्सा है। जल्द ही वे टीम के साथ स्थल का दौरा कर वहां की स्थिति का जायजा लेंगे। पहुंच मार्ग, स्वच्छता, पेयजल, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
सुविधाओं के विकास के बाद यह स्थल धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ट्रेकिंग और प्रकृति पर्यटन के रूप में भी अपनी नई पहचान बना सकता है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।
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