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कोंडागांव कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना को सौंपा ज्ञापन

रिपोर्टर शिवलाल मरकाम 
 
कोंडागांव - कृषि आदान विक्रेताओं की एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल; खाद-बीज की दुकानें रहीं बंद, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
कोंडागांव (27 अप्रैल 2026): अखिल भारतीय एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन (AIDA) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आज कोंडागांव जिले में कृषि आदान विक्रेताओं ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। इस दौरान जिले भर में खाद, बीज और कीटनाशकों की सभी दुकानें पूरी तरह बंद रहीं, जिससे बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। विक्रेताओं ने अपनी लंबित समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होकर प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखी।
प्रमुख मांगें और समस्याएं
व्यापारियों ने सरकार और प्रशासन से निम्नलिखित मुद्दों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है:
जबरन लिंकिंग (Tagging): उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों को जबरन खरीदने की बाध्यता से व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है, जिसे बंद करने की मांग की गई है।
परिवहन व्यय (FOR): FOR (Free On Road) आपूर्ति व्यवस्था लागू न होने के कारण डीलरों पर परिवहन का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
डीलर मार्जिन: बढ़ती महंगाई और संचालन लागत के बावजूद डीलरों के मार्जिन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जिसे बढ़ाने की मांग की गई है।
पोर्टल और लाइसेंसिंग की जटिलता: 'साथी पोर्टल' की जटिलताओं और लाइसेंस नवीनीकरण व निरीक्षण प्रक्रियाओं को ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे व्यापारियों के लिए सरल बनाने की मांग की गई है।
कालातीत कीटनाशक और अवैध बीज: कालातीत (Expired) कीटनाशकों की कंपनियों द्वारा वापसी सुनिश्चित करने और अवैध व बिना प्रमाणित बीजों की बिक्री पर सख्त रोक लगाने की मांग की गई है।

प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन
हड़ताल के दौरान जिले के कृषि आदान व्यापारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में एक विस्तृत ज्ञापन कलेक्टर और उपसंचालक कृषि (कोंडागांव) को सौंपा। व्यापारियों ने उम्मीद जताई है कि शासन-प्रशासन इन गंभीर मुद्दों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेगा।

किसानों को हुई असुविधा
हड़ताल के कारण जिले के किसानों को खाद, बीज और कीटनाशक मिलने में अस्थायी रूप से असुविधा का सामना करना पड़ा। हालांकि, कई किसानों ने व्यापारियों की मांगों को उचित मानते हुए अपना समर्थन दिया और उम्मीद जताई कि समस्याओं का समाधान जल्द होगा।

आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी
व्यापारी संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो वे आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप देने के लिए मजबूर होंगे। संघ ने चेतावनी दी है कि कृषि इनपुट डीलरों की समस्याएं अब गंभीर स्थिति में पहुंच चुकी हैं और यदि इसे अनदेखा किया गया, तो इसका सीधा असर पूरे कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा।

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