धमतरी/नगरी। केंद्र सरकार द्वारा 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू करने के फैसले पर सियासत शुरू हो गई है।
आदिवासी कांग्रेस जिलाध्यक्ष मनोज साक्षी ने फैसले को जन-विरोधी बताते हुए वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया के नाम पर लोगों को कैशलेस की आदत डाली गई और अब उसी पर शुल्क लगाया जा रहा है।
साक्षी ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में 314 लाख करोड़ के UPI लेनदेन में से 207 लाख करोड़ का लेनदेन 2000 से ऊपर का था, यानी दो-तिहाई राशि इस दायरे में आएगी। 3000 रुपये पर 12 रुपये और 50 हजार पर 200 रुपये तक व्यापारी को देना होगा, जिसका बोझ आखिर में ग्राहक पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि यह शुल्क महंगाई के दौर में जनता की जेब पर डाका है और इससे छोटे व्यापारियों को नुकसान होगा। कांग्रेस इसका विरोध करेगी।
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